भोपाल । चार सीटों पर उपचुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रेशर पॉलिटिक्स (खेल रही हैं। दोनों की दौड़ चुनाव आयोग तक है। कांग्रेस के निशाने पर सीएम शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा हैं और बीजेपी की नजर कमलनाथ पर। दोनों पक्षों की तरफ से अब तक 50 से ज्यादा शिकायतें चुनाव आयोग में की जा चुकी हैं।


लोकल अफसरों से शिकायत
उपचुनाव वाली सीटों पर दम लगा रहे सियासी दल चुनाव आयोग में शिकायत कर प्रेशर पॉलिटिक्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सीटों में आचार संहिता उल्लंघन को लेकर अब तक 50 से ज्यादा शिकायतें चुनाव आयोग से की जा चुकी हैं। जिला स्तर से लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में इन शिकायतों को भेजा गया है।


20 दिन में 50 शिकायतें
चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक बीते 20 दिन में 50 से ज्यादा शिकायतें चुनाव आयोग को मिली हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें कांग्रेस की तरफ से चुनाव आयोग में की गई हैं। कांग्रेस ने शिवराज सरकार के लगातार लिए जा रहे फैसलों की शिकायत चुनाव आयोग से की है। कांग्रेस के रडार पर सीएम शिवराज, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा से लेकर स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारी कर्मचारी हैं। कांग्रेस ने बीजेपी के दशहरे पर विजय संकल्प ध्वज फहराने से लेकर कैबिनेट में हो रहे फैसलों तक की शिकायत चुनाव आयोग से की है। सबसे ज्यादा शिकायतें लोकल अफसरों की है जिन पर प्रशासन के दबाव में काम करने का आरोप है।


मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर की करेंगे शिकायत
कांग्रेस महामंत्री जेपी धनोपिया भोपाल में आचार संहिता उल्लंघन मामलों पर नजर रखे हुए हैं। वो हर दिन चुनाव आयोग में दो से तीन शिकायतें भेज रहे हैं। धनोपिया का कहना है अब तक 25 से ज्यादा शिकायतें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को भेजी गई हैं। लेकिन उन शिकायतों के समाधान के संबंध में अब तक उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। जेपी धनोपिया ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा वह चुनाव के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर के खिलाफ शिकायत करेंगे कि उन्होंने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।


कमलनाथ पर आरोप
बीजेपी के निशाने पर कमलनाथ हैं। पार्टी ने कमलनाथ के खिलाफ संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी और जोबट में मतदाताओं को धमकाने की शिकायत आयोग से की है। बीजेपी मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने कहा कांग्रेस हर मामले में शिकायत कर आयोग चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के भरोसे को कम कर रही है। मतदान में अब 10 दिन का समय बाकी है।