TDP के बाद JDU ने दी BJP को नई टेंशन! NDA की मुश्किलें बढ़ीं
नई दिल्ली। JDU-TDP Demand: नरेंद्र मोदी आठ जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले ही NDA में शामिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है।
NDA में दवाब की राजनीति
2014 के बाद पहली बार बीजेपी को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। इस स्थिति में सरकार बनाने के लिए बीजेपी की निर्भरता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल दलों पर बढ़ गई है। NDA में सहयोगी दलों ने नरेंद्र मोदी का समर्थन तो किया है, लेकिन इस बीच दवाब की राजनीति भी शुरू हो गई है। JDU और TDP की मांगें NDA के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।
JDU की मांगें
JDU के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि अग्निवीर योजना को लेकर फिर से सोचने की जरूरत है। त्यागी ने आज तक से बात करते हुए कहा, “अग्निवीर योजना को लेकर बहुत विरोध हुआ था और इसका चुनाव में भी असर देखने को मिला है। इस पर दोबारा विचार करना आवश्यक है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (UCC) पर सभी राज्यों से व्यापक बातचीत होनी चाहिए। JDU ने पहले भी अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा था कि वह UCC के खिलाफ नहीं है, लेकिन सभी पक्षों से संवाद आवश्यक है।
TDP की मांगें
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, TDP ने केंद्र में लोकसभा स्पीकर का पद और 6 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग की है। हालांकि, TDP इसे पांच मंत्रालयों तक कम करने के लिए भी तैयार है।
बीजेपी की चिंता
JDU और TDP की इन मांगों ने बीजेपी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही ये सहयोगी दल अपनी महत्वपूर्ण मांगों के साथ दबाव बना रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इन मांगों को कैसे संबोधित करती है और NDA के सहयोगियों के साथ अपने संबंधों को कैसे मजबूत रखती है।


