टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र की वैश्विक पहुंच: एक नई दिशा में हिंदी का प्रसार

भोपाल: रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के परिसर में स्थापित ‘टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र’ ने वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार और पठन-पाठन के लिए एक नई दिशा निर्धारित की है। इस केंद्र का उद्देश्य हिंदी भाषा को विश्वव्यापी मंच पर स्थापित करना और एक करोड़ लोगों को हिंदी शिक्षण से जोड़ना है।
वैश्विक पहुंच: विश्व के 30 से अधिक देशों में इसकी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के साथ संबद्धता स्थापित की गई है, जिसमें ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड्स, सिंगापुर, मॉरीशस, रूस, सूरीनाम, बेल्जियम, यूएई, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड, नेपाल, स्पेन, स्विट्जरलैंड, श्रीलंका, जापान, थाइलैंड, मलेशिया, पुर्तगाल, यूक्रेन, उजबेकिस्तान, चीन, वियतनाम, जर्मनी, कतर, केन्या, और इंडोनेशिया शामिल हैं।
शिक्षण पाठ्यक्रम: ‘हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम’ का निर्माण रचनात्मकता और पठनीयता पर विशेष ध्यान देते हुए किया गया है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से हिंदी सीखने की सुविधा उपलब्ध होगी।
डिजिटल पहल: इस पाठ्यक्रम को डिजिटल स्वरूप में विकसित किया गया है और जल्द ही यह एंड्रॉइड फोन पर ऐप के जरिए भी उपलब्ध होगा।
उद्घाटन: विश्व रंग महोत्सव में पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा इस केंद्र का उद्घाटन किया गया।
भाषा और संस्कृति: विदेशों में भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति बढ़ती रुचि के साथ, यह केंद्र भारतीय भाषा शिक्षण को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास कर रहा है।
वैश्विक सहयोग: इस केंद्र के माध्यम से विदेशी भाषाओं के साहित्य को हिंदी में अनुवाद करने और प्रवासी भारतीयों की हिंदी भाषा एवं साहित्य की गतिविधियों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
निदेशक की भूमिका: डॉ. जवाहर कर्नावट को टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र का निदेशक नियुक्त किया गया है, जो वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के प्रसार में एक रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं।
इस नवीन पहल के माध्यम से, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र ने हिंदी भाषा के वैश्विक प्रसार में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे न केवल भारतीय संस्कृति को विश्वव्यापी मान्यता मिलेगी, बल्कि हिंदी भाषा के शिक्षण में भी एक नई क्रांति आएगी।


