National

लिए मंत्री का दबाव, मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी

मुंबई, । यह तो सभी जानते हैं कि मंत्रियों से लेकर सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा अधिकारियों पर दवाब डालकर उनसे अवैध काम करने के लिए कहा जाता है. कई ऐसे अधिकारी होते हैं जो लालच या फिर तबादले के डर से अवैध काम करते हैं तो कई ऐसे अधिकारी भी हैं जो साफ मना कर देते हैं. कुछ माह पूर्व मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का लेटर बम राज्य में काफी चर्चित रहा था. तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उन्होंने ई-मेल भेजकर कहा था कि तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने उन्हें 100 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया था. इसके बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया. अब फिर एक अधिकारी ने लेटर बम गिराया है. खबर है कि पुणे के निलंबित स्वास्थ्य अधिकारी भगवान पवार ने सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि गैरकानूनी काम के लिए एक मंत्री का उनपर दबाव है.
– भगवान पवार ने क्या लिखा है चिट्ठी में ?
भगवान पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, अजित पवार, राज्य के मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। उस पत्र में भगवान पवार ने दावा किया है कि चूंकि वह पिछड़ा वर्ग के अधिकारी हैं, इसलिए परेशान करने की मंशा से उन्हें निलंबित किया गया है. पत्र में कहा गया है कि मंत्री महोदय ने मुझे बार-बार पुणे के कात्रज स्थित अपने कार्यालय में बुलाया और अवैध टेंडर कार्यों, खरीद प्रक्रिया कार्यों और अन्य कार्यों में मदद करने के लिए मुझ पर दबाव डाला। परंतु मैंने गैरकानूनी काम में मदद नहीं की परिणामस्वरूप मुझे निलंबित कर दिया गया है।
– पुरानी शिकायतों के लिए समिति
मैंने निलंबन के संबंध में मैट में दावा दायर किया है। लेकिन मेरा मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया गया और पुणे महानगर पालिका में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी का पद खाली कराने के प्रयास शुरू कर दिये गये. इसके लिए पुरानी शिकायत के अनुरूप दिनांक 29/04/2024 को एक जांच समिति का गठन किया गया और मंत्री जी को बिना जांच के ही जल्दबाजी में अपेक्षित रिपोर्ट मिल गयी. तब से मुझे निलंबित कर दिया गया है. भगवान पवार ने पत्र में दावा किया है कि मेरा निलंबन मंत्री के दबाव के कारण हुआ है. निलंबन के कारण मेरा मनोबल टूट गया है और मेरा परिवार तनाव में है. निलंबन के दौरान मुझे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया. भगवान पवार ने पत्र में निलंबन वापस लेने की मांग की है. अब इस पत्र के बाद अवैध काम में मदद करने की बात कहने वाले मंत्री कौन हैं? इस संबंध में चर्चा शुरू हो गई है.

Related Articles