सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया: गवाह के मुकरने से दोषी की सजा नहीं होगी रद्द

नई दिल्ली: एक निर्णायक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गवाह के मुकर जाने से दोषी व्यक्ति की सजा स्वतः ही रद्द नहीं हो जाती। जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता में बेंच ने तमिलनाडु के एक मामले में निचली अदालत और हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा।
इस मामले में, एक 22 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया था कि उसके साथ वनियामपड़ी टाउन में 28 जनवरी 2006 को गैंगरेप किया गया था। आरोपी को निचली अदालत ने गैंगरेप के लिए दोषी पाया और 10 साल की सजा सुनाई, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि अभियोजन पक्ष के गवाह के मुख्य बयान और जिरह के दौरान उसके बयान में अंतर था, जिससे यह संकेत मिलता है कि गवाह आरोपी के प्रभाव में आ गया था। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता के बयान, गवाह के मैजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान और मेडिकल रिकॉर्ड से पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं।
इस फैसले के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों के मुकरने का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और दोषसिद्धि को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। यह फैसला न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम है और यह दर्शाता है कि न्यायालय अपराधियों को सजा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ है।


