क्या है SC-ST अधिनियम? जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी ….

इलाहाबाद । एससी/एसटी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है कि एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध सार्वजनिक जगह पर होना चाहिए। यानी कि जानबूझकर अपमानित करने के कथित कृत्य को इस अधिनियम के तहत अपराध माना जाएगा जब यह सार्वजनिक जगह पर किया जाए। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता पिंटू सिंह और दो अन्य लोगों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट की संबंध में मुकदमा रद्द कर दिया गया है।
अब आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि एससी-एसटी अधिनियम क्या है और इसके तहत क्या प्रावधान है। तो चलिए, मैं आपको इसके बारे में थोड़ी जानकारी दूं:
एससी-एसटी अधिनियम (अत्याचार निरोधक अधिनियम), 1989:
– यह अधिनियम अत्याचार निवारण (Prevention of Atrocities) या अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है।
– इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों और जनजातियों में शामिल लोगों के खिलाफ अपराधों को दंडित करना है।
– इस अधिनियम के तहत पीड़ितों को विशेष सुरक्षा और अधिकार दिए जाते हैं।
– यह अधिनियम अपराधिक मुकदमों में आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है।
– अपराध सिद्ध होने की स्थिति में 40 हजार से 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता का प्रावधान है।


