मध्यप्रदेश में कोरोना ने पलटवार किया है। कई जिलों में संक्रमितों का आंकड़ा अचानक बढ़ गया। यह वही अंदेशा है जो विशेषज्ञ जता रहे थे कि ठंड की शुरुआत में कोरोना की दूसरी लहर आएगी। सरकार को इससे निपटना जरूरी नहीं लगता, शायद इसीलिए महाराष्ट्र से लौटते ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कोराना से पहले राहुल-सोनिया गांधी पर हमला बोलना ज्यादा जरूरी समझा।

शिवराज ने कहा- राहुल गांधी से सवाल पूछना चाहता हूं कि क्या वे आठ दलों के साथ बनाए गए गुपकार गैंग के साथ हैं। यह ग्रुप एंटी नेशनल एलायंस है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला 11 अक्टूबर को एक टीवी चैनल से बात करते हुए यह कहते हैं कि हम चीन की मदद से धारा 370 की वापसी कर आएंगे। 23 अक्टूबर को महबूबा मुफ्ती जी बोलती हैं, हम उस वक्त तक तिरंगा नहीं उठाएंगे, ना ही किसी को उठाने देंगे, जब तक कि हमारे कश्मीर का झंडा हमें वापस नहीं मिल जाता। उनके नक्शे कदम पर चलते हुए राहुल गांधी जी वह नेता है, जिन्होंने धारा 370 को हटाना देश की सुरक्षा को खतरा बता दिया था। यह कांग्रेस पहली बार नहीं कर रही है। कहा- गुपकार गैंग में डॉ. फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस, महबूबा मुफ्ती की अगुआई वाली पीडीपी के अलावा सज्जाद गनी लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट, माकपा और कांग्रेस शामिल है।

सोनिया गांधी बताएं वे किसके साथ हैं

मैडम सोनिया गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी अलगाववादी मानसिकता धारा 370 और 35A हटाने के पक्ष में हैं। आतंकवादियों के साथ उनके रिश्ते क्या है? बटला हाउस एनकाउंटर के बाद सोनिया गांधी रातभर आंसू बहाते रहीं। क्यों दिग्विजय सिंह आतंकवादियों के साथ खड़े हुए? अब्दुल्लाह और मुफ्तियों और एक परिवार के गांधियों की एकजुटता है। धारा 370 हटाने के बाद कश्मीर खुली हवा में सांस ले रही है। जहां कभी खून के निशान दिखते थे, वहां प्राकृतिक सौंदर्य आने लगा है। जम्मू कश्मीर की जन्नत में फिर से जहर खोलने का प्रयास किया जा रहा है। उन प्रयासों में कांग्रेस उनके साथ खड़ी हुई दिखाई दे रही है। इसलिए कांग्रेस को अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए। क्या कांग्रेस उस संगठन के साथ खड़ी हुई है। आज मैं सोनिया से पूछना चाहता हूं और देश जानना चाहता है कि क्यों वे धारा 370 के विरोधी हैं। क्यों उनका बयान आतंकवादियों के साथ खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।

पंडित नेहरू ने देश का विभाजन किया

देश की आजादी के समय से ही यह चल रहा है। मैं भी यह कहना चाहता हूं कि आदरणीय पंडित नेहरू ने देश के विभाजन को स्वीकार किया था। उन्होंने ही देश का विभाजन करवाया था। वह आदरणीय पंडित नेहरू जी थे, जिन्होंने कश्मीर में धारा 370 लागू करवाई। उन्होंने एक देश में दो प्रधान, दो निशान और दो संविधान बनाए।

वह पंडित नेहरू ही थे, जिन्होंने कश्मीर का मामला जो हमारे देश का आंतरिक मामला था, उसे संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाकर जनमत संग्रह तक की बात कही। अलगाववादी मानसिकता में कांग्रेस आज भी है। यह गुपकार संगठन नहीं गुप्तचर संगठन है। यह चीन और पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले लोग है। संगठन के नेताओं ने 25 हजार करोड़ से ज्यादा की जमीन हड़पी है।

कश्मीरी बेटे-बेटियों के हाथ में पत्थर दे दिए

इनके बच्चे विदेशों में पढ़ते रहे। कश्मीरी बेटे-बेटियों के हाथ में पत्थर देते रहे। कश्मीर को लूटकर उसे अंधेरे में धकेल दिया। इकट्ठे होकर देशद्रोही की भाषा बोल रहे हैं। कांग्रेस भी इनके साथ हैं। उनके साथ खड़ी हुई है। कांग्रेस उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। हकीकत में कांग्रेस हमेशा से देशद्रोही तत्वों का साथ देती रही है। यहां तक कि पी चिदंबरम खुलेआम कह रहे हैं, गुलाम नबी आजाद कह रहे हैं, कश्मीर से धारा 370 फिर से बहाल होनी चाहिए। 13 नवंबर को जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस ने उपकार गैंग में शामिल होने की घोषणा की थी। बैठक में कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं। कांग्रेस उस घोषणा पत्र का हिस्सा है।