श्रीनगर,कोरोना के चलते पूरे देश में डर का माहौल है। डर और दहशत के बीच कारगिल में एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया है। जहां एक ओर मां की गोद में खुशियों की किलकारी गूंजी है वहीं अपनी नन्ही जान का मुंह न देख पाने से पिता बेचैन हैं। दरअसल परिवार के एक सदस्य के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद महिला और उनका परिवार क्वारंटीन पीरियड पूरा कर रहा है। क्वारंटीन में रहते हुए ही महिला को प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। इसे भारत का पहला क्वारंटीन बेबी बताया जा रहा है।
जहरा बानो पेशे से गाइनोकॉलजिस्ट हैं। उन्होंने 28 मार्च को कारगिल के जिला अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। जहरा बताती हैं कि नवजात शिशु का वजन 3.5 किलो है और उसे जरूरी वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। डिलिवरी से दो दिन पहले जहरा को क्वारंटीन फैसिलिटी से अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।
 
महिला को ओपीडी में रखा गया था
कारगिल के जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. काचू सिकंदर अली खान बताते हैं, 'हमने मां को ऑउट पेशंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में शिफ्ट किया था और इस बात का खास ध्यान रख रहे थे कि वह किसी अन्य मरीज के संपर्क में न आने पाएं।' कारगिल के डीसी बशीर खान ने बताया कि इस वक्त जिले में करीब 353 लोग क्वारंटीन में हैं।

मां की रिपोर्ट कोरोना निगेटिव
जहरा के दो बार सैंपल लिए जा चुके हैं और उनकी रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आई है लेकिन फिर भी महिला को देखने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने एहतियाती तौर पर प्रोटेक्टिव गियर पहने थे। मंगलवार को उन्होंने अपना क्वारंटीन पीरियड पूरा कर लिया जिसके बाद उन्हें अब जल्द ही रिहा किया जाएगा।

बच्चे के जन्म से अस्पताल स्टाफ भी खुश
डॉ. काचू सिकंदर अली खान ने बताया कि बच्चे के जन्म से अस्पताल स्टाफ के चेहरे पर भी रंगत आई है। वह कहते हैं, 'संकट के समय में, हमारा स्टाफ गर्भवती महिला को मेडिकल के साथ-साथ इमोशनल सपोर्ट भी दे रहा था क्योंकि वह अकेले थीं। उदाहरण के तौर पर सैनिटाइजिंग स्टाफ में कार्यरत फातिमा लेबर के दौरान जहरा के साथ बनी रहीं।'

पिता अभी कुछ दिन नहीं देख पाएंगे बच्चे का मुंह
वहीं अभी क्वारंटीन में रह रहे बच्चे के पिता ने कहा कि वह खुश होने के साथ-साथ बेचैन भी हैं। विलायत अली बताते हैं, 'यह मेरा तीसरा बच्चा है, काश मैं उनके साथ होता। मैं डॉक्टरों का आभारी हूं जिन्होंने हमें सपोर्ट किया। मेरे भाई के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद हमें संकू से क्वारंटीन फैसिलिटी में शिफ्ट किया गया। यह सफर बेहद जटिल था, बाहर बर्फबारी हो रही थी लेकिन हमें ऐंबुलेंस से मेडिकल स्टाफ की देख-रेख में क्वारंटीन में पहुंचाया गया।'