मुंबई । योगगुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के द्वारा रुचि सोया डील में एक नई उलझन खड़ी हो गई है। पतंजलि आयुर्वेद इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत 4,350 करोड़ रुपये में ऐडिबल ऑयल कंपनी रुचि सोया को खरीदने की राह में बाधा खड़ी हो गई है क्योंकि एसबीआई ने इसके लिए अकेले कर्ज देने से इनकार कर दिया है। उसने कहा है कि इस डील से जिन दूसरे कर्जदाताओं को लाभ होगा, वे भी कर्ज देने में हाथ बंटाएं। रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि ने 3,700 करोड़ रुपये कर्ज लेने की योजना बनाई है, जबकि 600 करोड़ रुपये उसने अपनी तरफ से लगाने की बात कही थी। यह जानकारी अगस्त में पतंजलि की तरफ से सौंपे गए रिजॉल्यूशन प्लान से मिली है। रुचि सोया में एसबीआई का सबसे अधिक 1,800 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। इसलिए रिजॉल्यूशन प्लान से सबसे अधिक लाभ भी उसे ही होगा। हालांकि, उसके हालिया रुख के बाद अब रिजॉल्यूशन प्लान के सफल होने पर संदेह जताया जा रहा है। बैंक के एक सीनियर अफसर ने बताया, ‘हमने फैसला किया है कि रिजॉल्यूशन प्लान से जिन बैंकों को जितने का फायदा होगा, वे उसी अनुपात में कंपनी को खरीदने के लिए कर्ज दें। हम अकेले पूरा कर्ज नहीं दे सकते। पतंजलि बहुराष्ट्रीय कंपनी नहीं है। उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। हम उसे कर्ज देने को लेकर बहुत सहज नहीं हैं और अकेले यह जोखिम नहीं उठा सकते। हर किसी को इसमें हाथ बंटाना चाहिए।’ रुचि सोया से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 816 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक को 743 करोड़, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को 608 करोड़, डीबीएस को 243 करोड़ रुपये वसूलने हैं। पतंजलि ने एडिबल ऑयल कंपनी को खरीदने की खातिर कर्ज लेने के लिए ज्यादातर सरकारी बैंकों से संपर्क किया है। हालांकि, बैंक अब उसे और कर्ज देने में आनाकानी कर रहे हैं।
सरकारी बैंक के एक अधिकारी ने बताया, ‘एसबीआई इस सौदे के लिए दूसरे बैंकों को कर्ज देने पर मजबूर नहीं कर सकता। यह यह कमर्शियल डिसिजन है। हर बैंक अपने हित देखकर फैसला करेगा। वे दिन गए, जब दूसरे बैंक एसबीआई जैसे लीड बैंक को देखकर फैसला लेते थे और बैंक मिलकर कर्ज देते थे। अब हर कोई अपना फैसला ले रहा है। पतंजलि को रुचि सोया की बोली लगाते वक्त ही फंडिंग का इंतजाम करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अगर सौदे पर बात नहीं बनती तो बैंक कंपनी की तरफ से दी गई गारंटी भुनाने की सोच सकते हैं।’ इस साल अक्टूबर में केयर और इकरा ने पतंजलि की रेटिंग घटाई थी। इस वजह से भी बैंकों की उसे कर्ज देने में दिलचस्पी घटी है। हालांकि, सारे बैंक उसे कर्ज देने के विरोधी नहीं हैं। एक अन्य सरकारी बैंक के अधिकारी ने बताया, ‘पतंजलि के कई सरकारी बैंकों के साथ रिश्ते हैं। इसलिए अगर हम उसे कर्ज की पेशकश करते हैं तो वह सही कदम होगा। मुझे नहीं लगता कि कंपनी को कोई समस्या होनी चाहिए।’ इस बारे में पूछे गए सवालों का पतंजलि ने खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं दिया था। हालांकि उसके एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी रुचि सोया को खरीदने के लिए फंड के इंतजाम में जुटी है।