नई दिल्ली । दुनिया बहुत तेजी से 5जी टेक्नॉलजी की तरफ बढ़ रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से जो घटनाएं हुई हैं, उसके कारण इस रेस से चीन से विभिन्न देश धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं। स्वीडन के बाद बुल्गारिया ने भी 5जी टेक्नॉलजी को लेकर चाइनीज कंपनियों को झटका देते हुए अमेरिका के साथ करार कर लिया है।
भारतीय कंपनी रिलायंस जियो ने भी पिछले दिनों अमेरिकी कंपनी क्वालकॉम के साथ 5जी का सफल परीक्षण किया है। बुल्गारिया ने बाल्कन क्षेत्र के कुछ अन्य देशों की तरह 5जी टेक्नॉलजी को लेकर अमेरिका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। बुल्गारिया का यह कदम अपने यहां 5जी इकोसिस्टम से चीन की कंपनियों को बाहर रखने पर केंद्रित है। इससे पहले बाल्कन के अन्य देश जैसे उत्तरी मेसीडोनिया और कोसोवो आदि भी अमेरिका के साथ इसी तरह का समझौता कर चुके हैं।
बुल्गारिया ने 'क्लीन नेटवर्क' सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के द्वारा दुनिया भर में 5जी इकोसिस्टम से चीन की कंपनियों को बाहर रखने की मुहिम का हिस्सा है। पिछले दिनों स्वीडन ने भी चीन को देश के सबसे बड़े खतरों में से एक बताते हुए 5जी टेक्नॉलजी के लिए चीनी कंपनी हुआवेई और जेटीई के नेटवर्क-उपकरणों के इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। देश के दूरसंचार नियामक ने मंगलवार को कहा कि 5जी टेक्नॉलजी के लिए होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी में भाग लेने वाली चार दूरसंचार कंपनियां किसी भी तरह से हुआवेई और जेडटीई के उत्पाद उपयोग नहीं कर सकेंगी। ये शर्तें स्वीडन की सेना और सुरक्षा सेवाओं द्वारा की गई समीक्षा के आधार पर निर्धारित की गई हैं।
पिछले दिनों अमेरिकी टेक्नॉलजी फर्म क्वालकॉम के साथ मिलकर रिलायंस जियो ने अमेरिका में अपनी 5जी टेक्नॉलजी का सफल परीक्षण किया था। आने वाले दिनो में भारत में यूजर्स वन जीबीपीएस तक की स्पीड का लाभ उठा पाएंगे। जियो की 5जी टेक्नॉलजी पूरी तरह स्वदेशी होगी। जियो ने स्वदेशी 5जी रान (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) तैयार किया है जो अल्ट्रा हाई स्पीड आउटपुट देने के लिए परफेक्ट है। इस प्रॉडक्ट का अमेरिका में सफल परीक्षण भी कर लिया गया है। मतलब, रिलायंस की 5जी सर्विस अमेरिकी टेक्नॉलजी और इंडियन इक्विपमेंट्स वाली होगी।