निजी में ट्रायल, सरकारी में सिर्फ ट्राय:क्लीयरेंस में देरी और कंस्ट्रक्शन ने अटका दिया भोपाल के सरकारी अस्पताल में को-वैक्सीन का ट्रायल
 

तस्वीर भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर की है, जहां पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है और सामान चारों तरफ बिखरा हुआ है।
स्वदेशी कोरोना कोवैक्सीन के थर्ड फेज का क्लीनिकल ट्रायल निजी अस्पताल में चल रहा है
भोपाल में वाॅलंटियर्स को 1 हजार डोज लगाए जाएंगे, जो 27 नवंबर से शुरू हो गए

भोपाल में दो मेडिकल कॉलेजों में कोरोना के टीके कोवैक्सीन का ट्रायल होना था, लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज केवल ट्राय करता रहा। इसके उलट पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में वैक्सीन के टीके आ गए और 27 नवंबर से ट्रायल भी शुरू हो गया। जीएमसी में ट्रायल रुकने की सबसे बड़ी वजह एथिकल कमेटी की क्लीयरेंस में देरी और हमीदिया अस्पताल में चल रहा कंस्ट्रक्शन रहा। सरकारी तैयारियों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि अब जल्द ही ट्रायल दूर करने के लिए फिर से ट्राय किया जा रहा है।

भारत बॉयोटेक ने 20 नवंबर को भोपाल के सरकारी गांधी मेडिकल कॉलेज को लेटर जारी कर कहा कि हमें अभी एथिकल कमेटी का क्लीयरेंस नहीं मिला है। इसलिए आपके यहां ट्रायल नहीं कर सकते हैं। इधर जीएमसी ने उसी दिन एथिकल क्लीयरेंस का लेटर कंपनी को भेज दिया था। लेकिन भारत बॉयोटेक कंपनी ने अब तक ट्रायल के लिए जीएमसी को मंजूरी नहीं दी है।

जीएमसी में हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग बन रही है, जिसकी वजह से धूल-मिटटी फैली हुई है। ये भारत बॉयोटेक की टीम को पसंद नहीं आया। यही वजह रही कि उन्होंने एमडीआरयू की साइट दिखाई थी, लेकिन वह उन्हें पसंद नहीं आई।

नई साइट देखने के बाद ही पता चलेगा मंजूरी

इसके बाद जीएमसी ने भारत बॉयोटेक को नया B-ब्लॉक, टीबी हॉस्पिटल और वायरोलॉजी लैब का हॉल दिखाया। लेकिन अब तक कंपनी ने जीएमसी में ट्रायल की मंजूरी नहीं दी है। जीएमसी की टीम लगातार जुटी हुई है। अब बताया जा रहा है कि सोमवार को फिर से कंपनी के प्रतिनिधि फिर से निरीक्षण करेंगे। जीएमसी को उम्मीद है कि इस निरीक्षण के बाद ट्रायल को मंजूरी मिल जाएगी।

गांधी मेडिकल कॉलेज में अब फिर से भारत बायोटेक को दूसरी तीन साइट के बारे में लिखा है और कहा है कि हम ट्रायल कराने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को भारत बायोटेक के प्रतिनिधि यहां आएंगे और वह साइट का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद ही ट्रायल की मंजूरी मिलने की संभावना है। फिलहाल सरकारी मेडिकल कॉलेज जीएमसी को वैक्सीन के ट्रायल के लिए अभी इंतजार करना पड़ रहा है।

कैटेगरी 2 में है गांधी मेडिकल कॉलेज

गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अरुणा कुमार ने कहा कि हमारे कॉलेज को कैटेगरी 2 में रखा गया है, जबकि पीपुल्स को कैटेगरी 1 में रखा गया है। कैटेगरी 2 हायर है, क्योंकि इसमें वॉलंटियर्स को दो डोज देने के बाद बाद लगातार फॉलोअप किया जाएगा और इसके रिजल्ट को लगातार कंपनी को भेजने होंगे।

पीपुल्स में शुरू हुआ ट्रायल

भोपाल के निजी अस्पताल पीपुल्स मेडिकल कॉलेज ने सब कुछ तय समय में ही पूरा करके भारत बायोटेक को ट्रायल की अनुमति दे दी। बायोटेक इंटरनेशनल ने 27 नवंबर से अपने वैक्सीन का ट्रायल शुरू कर दिया है। पहले दिन 7 लोगों को टीके ही डोज दी गई है। यहां पर 1 हजार वालंटियर्स को टीके के डोज दिए जाएंगे।

सरकारी और प्राइवेट की कैटेगरी न करें

शिवराज सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल में आगे भी ट्रायल होते रहेंगे, इन्हें सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में बांटने की जरूरत नहीं है। दोनों जगह केंद्र सरकार के निर्देशानुसार ही ट्रायल हो रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार ही ट्रायल चल रहे हैं। जीएमसी की साइट को लेकर दिक्कत थी, जिसे मेडिकल कॉलेज ने दूर कर लिया है। उन्होंने नई साइट दी है। जल्द ही यहां पर भी ट्रायल शुरू हो जाएगा।