नर्सिंग, एफडी घोटाले के मास्टर माईंड एमपीएमएसयू के वीसी, रजिस्ट्रार के समर्थन में खड़े हुए नौकरशाह!
सीएम चाह रहे सख्त कार्रवाई, बचाव में जुटे अधिकारी
जबलपुर । मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमपीएमएसयू) प्रबंधन के खिलाफ 120 करोड़ रुपए की एफडी मामले में हालहीं में सीएस वीरा राणा के निर्देश पर एसीएस चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान द्वारा कराई गई जांच में भयंकर आर्थिक अनियमितताएं सामने आई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले नर्सिंग घोटाले और वर्तमान मे 120 करोड़ कीं एफडी के मामले में कथित तौर पर कुलपति (वीसी) डॉ. अशोक खंडेलवाल एवं रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल के साथ तत्कालीन वित्त नियंत्रक रविशंकर डेकाटे की भूमिका बेहद संदेहास्पद नजर आ रही हैं। जिसे एमपीएमएसयू की खतरनाक तिकड़ी की संज्ञा दी जाती हैं। सूत्रों की मानें तो हालहीं में मामले की जांच करने पहुंची कमेटी के संज्ञान में भी यह बात आई। कमेटी द्वारा रिपोर्ट भी वरिष्ठों को सौंप दी गई हैं। मामले में चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही हैं कि प्रदेश की छवि खराब करने वाले नर्सिंग घोटाले और एफडी घोटाले में जहाँ प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तत्काल सख्त कार्रवाई करना चाह रहे हैं वहीं प्रदेश के शीर्ष नौकरशाहों की टीम एमपीएमएसयू प्रबंधन के अधिकारियों के बचाव में खड़ी हो गई हैं। जहाँ एमपीएमएसयू में एफडी मामले की कछुआ गति से जांच कर रही टीम अचानक कब्र से बाहर निकल कर वर्तमान प्रबंधन को छोड़ किसी पुराने वीसी, रजिस्ट्रार पर एफडी का ठीकरा फोड़ने पूरा जोर लगा रही हैं तो वहीं प्रदेश के शीर्ष नौकरशाहों की टीम ने इस तरह वर्तमान प्रबंधन पर अपना आंचल ढ़ंक दिया है कि नर्सिंग और एफडी घोटाले की जांच की आंच से कहीं वे झुलस न जाएं।
– आरजीपीवी में एफआईआर, एमपीएमएसयू में अभयदान
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 19 करोड़ का एफडी घोटाला सामने आने के बाद जहाँ मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर तत्काल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी कुछ आरोपी अब भी पुलिस से भाग रहे हैं वहीं एमपीएमएसयू में एफडी घोटाला पहले स्थानीय निधि संपरीक्षा इसके बाद कार्यपरिषद सदस्यों के और वर्तमान में सीएस के निर्देश पर एसीएस द्वारा जांच के लिए भेजी गई टीम की जानकारी में आने के बाद भी अब तक न मामले में एफआईआर हो पाई हैं नहीं वास्तविक आरोपियों की गिरफ्तारी। आलम ये हैं कि एफडी मामले में हाल ही में कब्र से बाहर निकल कर आई कमेटी पूर्व के वीसी और रजिस्ट्रारों से पूछताछ कर रही हैं लेकिन इस तिकड़ी से पूछताछ करने का सामर्थ्य नहीं जुटा पाई। हालांकि सूत्रों के अनुसार इसकी वजह कमेटी को एक साल से हर माह लाखों में जारी हो रहे मानदेय को भी बताया जा रहा हैं।
-308 कॉलेजों को इन्हीं ने दी संबद्धता
वर्तमान में प्रदेश भर में सुर्खियों में आए नर्सिंग घोटोले और 120 करोड़ की एफडी के घोटाले की जड़ और सूत्रधार एमपीएमएसयू की उक्त खतरनाक तिकड़ी ही रही। सूत्रों के अनुसार एमपीएमएसयू के वर्तमान प्रबंधन ने ही करीब 308 ऐसे कॉलेजों को नियमों को ताक पर धर कर मान्यता दे दी जिन्हें कई कार्यपरिषद सदस्यों ने भी संबद्धता देने योग्य नहीं पाया। बाद में इन्हीं कॉलेजों की हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच हुई और कुल 600 कॉलेजों में से 308 नर्सिंग कॉलेजों को एमपीएमएसयू की तरह ही सीबीआई अधिकारियों ने भी क्लीन चिट दे दी। हालांकि अब दिल्ली से आई सीबीआई की टीम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ कॉलेजों की कुंडली निकालने में जुटी हैं। ज्ञात हो कि मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग के चेयरमैन अनिल भास्करन, प्रिंसिपल सूना अनिल भास्करन और सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज को रिश्वत मामले में गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद श्री राज को सीबीआई ने बर्खास्त भी कर दिया। बताते हैं नर्सिंग कॉलेज घोटाले के केस में कॉलेज की सही रिपोर्ट पेश करने के बदले में सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज ने रिश्वत मांगी थी। नर्सिंग घोटाले में अब तक 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
-कब सीबीआई के रडार पर आएगी खतरनाक तिकड़ी
इस मामले में जांच में एड़ी चोटी का जोर लगा रही सीबीआई के रडार पर कब उक्त खतरनाक तिकड़ी आ पाएगी यह तो कहना संभव नहीं हैं। सूत्रों की माने तो नौकरशाहों ने इस खतरनाक तिकड़ी को कुछ इस तरह प्रश्रय दे रखा हैं कि सीबीआई तो क्या कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति ही क्यों न चाह ले इस तिकड़ी पर कोई आंच नहीं आएगी। बताते हैं कि तिकड़ी ने राज खोल दिए तो कई माननीयों को भी सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता हैं इस लिए नौकरशाह इन दिनों यही राग अलाप रहे हैं कि इशारों को अगर समझो राज को….



