एम्स भोपाल में अब ला-इलाज बीमारियों का भी इलाज संभव हो सकेगा – प्रोफेसर (डॉ) अजय सिंह

भोपाल । एम्स में अब ला-इलाज बीमारियों का भी इलाज संभव हो सकेगा। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अजय सिंह ने ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग के सेल और ऊतक इंजीनियरिंग प्रयोगशाला में आज 24.05.2024 को 3D बायो प्रिंटर का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज एम्स भोपाल में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। जिससे कि अब कई ला-इलाज बीमारियों का भी इलाज खोजने में सहायता मिलेगी। विशेष रूप से कैंसर जैसी घातक बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। 3-डी बायोप्रिंटर वर्धमान समूह से सीएसआर फंड के तहत खरीदे गए उपकरणों में से एक है। 3-डी बायोप्रिंटिंग एक उन्नत विनिर्माण प्रक्रिया है जो जीवित कोशिकाओं और बायोमटेरियल से बने बायो-इंक की परत बनाकर तीन आयामी जैविक संरचनाएं बनाती है। इस अभिनव तकनीक में पुनर्योजी चिकित्सा, फार्मास्यूटिकल्स और बायोमेडिकल अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों को बदलने की क्षमता है। 3D बायो प्रिंटिंग मशीन एक किस्म का प्रिंटर है जिससे ह्यूमन टिशु यानी कि इंसान के शरीर में मौजूद टिशु निकाले जा सकते हैं। इस मशीन के द्वारा मानव स्किन यानी की त्वचा को बनाया जा सकता है। अभी तक यह केवल तभी संभव था जब कोई व्यक्ति अंग डोनेट करें या फिर किसी सर्जरी के माध्यम से टिशु को निकाला जाए। इन्हीं परेशानियों से बचने के लिए 3D बायो प्रिंटर के द्वारा ह्यूमन स्किन बनाया जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग रक्त वाहिकाओं हड्डियों हृदय त्वचा आदि जैसे जीवित ऊतकों को बनाने के लिए किया जा सकता है। 3D बायो प्रिंटिंग का उपयोग करके ऊतकों को पुनर्जीवित किया जा सकता है विशेष रूप से हड्डी और त्वचा के ऊतकों के लिए इस नई तकनीक के जरिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में नई क्रांति आ सकती है। प्रोफेसर सिंह ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत वर्धमान समूह द्वारा प्रदत्त इस 3D बायो प्रिंटिंग मशीन के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे और भविष्य में भी उनसे मिलने वाले सहयोग से हम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर पाएंगे। एम्स भोपाल में 3D बायो प्रिंटर की सुविधा अपने आप में पहली है। इस अवसर पर वर्धमान समूह के निदेशक श्री एस पाल के अतिरिक्त अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। इससे पूर्व उयस्थिति का स्वागत करते हुए ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. रूपिंदर कौर ने 3-डी बायोप्रिंटिंग की परिवर्तनकारी क्षमता और स्वास्थ्य सेवा के भविष्य में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की ।



