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बेतवा नदी की दुर्दशा: मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नदी का संकट

मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी, बेतवा नदी, जिसे ‘MP की गंगा’ के रूप में भी जाना जाता है, आज गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। विदिशा जिले से निकलने वाली यह नदी, जो कभी साफ और निर्मल बहती थी, अब हरियाली से ढकी एक विस्तृत जलक्षेत्र की तरह दिखाई देती है। इसकी सफाई के लिए बनाई गई योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं, और चुनावी मौसम में भले ही यह मुद्दा उठता हो, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इसकी ओर से नेताओं का ध्यान हट जाता है।

विदिशा और रायसेन जिलों के लिए जीवनदायिनी के रूप में प्रसिद्ध, बेतवा नदी ने लाखों किसानों की फसलों को सिंचित किया है और विदिशा शहर के निवासियों की प्यास बुझाई है। लेकिन आज, इसकी दुर्दशा ने इसे प्रदूषण का प्रतीक बना दिया है। धार्मिक आस्था का केंद्र होने के नाते, बेतवा नदी में स्नान करने की परंपरा रही है, लेकिन अब इसके प्रदूषित जल के कारण लोगों को स्नान से मना किया जा रहा है।

बेतवा की सफाई के लिए अभियान चलाने वाले समाजसेवी और नेता भी इसकी दुर्दशा को सुधारने में असमर्थ रहे हैं। अभियान, जो फोटो सेशन तक सीमित रह गए हैं, ने नदी की स्थिति में कोई सुधार नहीं किया है। बेतवा नदी की हरितिमा यह दर्शाती है कि इसमें जलीय जीवन का अस्तित्व खतरे में है, और इसका पानी अब पीने योग्य नहीं रहा।

विदिशा बेतवा घाट पर स्थित मंदिरों के पुजारी भी इसकी सफाई की मांग कर चुके हैं, लेकिन उनकी आवाजें अनसुनी रह गई हैं। यह नदी, जो कभी धार्मिक आस्था का केंद्र थी, आज बीमारियों का स्रोत बन गई है।

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