ब्रिटेन में खांस-खांस कर पांच बच्चों की मौत!

कोरोना से भी तेज फैल रहा इंफेक्शन, 2,793 मामले आए सामने
लंदन,। ब्रिटेन में तेजी से फैल रही काली खांसी (पर्टुसिस) के 2,793 मामले सामने आ चुके है। इस बीमारी से अब तक पांच बच्चों की मौत होना बताया जा रहा है। एक और बच्चे की मृत्यु की मौत का पता चला है जिसके बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। बताया जाता है कि काली खांसी छोटे बच्चों पर बुरा प्रभाव डाल रही है। बड़े बच्चों और वयस्कों में इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। काली खांसी इतनी खतरनाक है, इसका अंदाजा बात से लगाया जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर हर साल काली खांसी के अनुमानित 2 करोड़ 40 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से करीब 1.6 लाख की मौत हो जाती है।
काली खांसी बोर्डेटेला पर्टुसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। पर्टुसिस अक्सर सांस लेने की बीमारियों से जुड़े इंफेक्शन से शुरू होती है, जिसमें नाक बहना और बुखार मुख्य लक्षण होते हैं। हूप कफ खांसी की बीमारी के एक या दो सप्ताह बाद ही हो सकता है। हालांकि यह सभी मामलों में हो ऐसा जरूरी नहीं है।
जानकारों की मानें तो काली खांसी बहुत तेजी से फैलती है। औसतन पर्टुसिस का एक मामला करीब 15-17 लोगों में इंफेक्शन फैलाता है। यह इंफेक्शन कोविड वेरिएंट से अधिक है। काली खांसी के इंफेक्शन का असर पांच सप्ताह तक रहता है। जल्द उपचार करना ही इसके फैलाव को कम कर सकता है। एंटीबायोटिक्स उपचार शुरू करने के केवल पांच दिन बाद इंफेक्शन को कम करने में सक्षम हैं पुष्ट और बिना लक्षण वाले दोनों मामले काली खांसी के आगे फैलने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
काली खांसी का एक अजीब पहलू यह है कि आमतौर पर कुछ सालों में इसका बड़ा प्रकोप होता है। यूके में आखिरी बड़ा प्रकोप 2016 में हुआ था, जिसमें करीब 6,000 मामले सामने आए थे। प्रारंभिक टीकाकरण के कुछ सालों बाद इसमें गिरावट आती है यही कारण है कि पूरी आबादी में लगातार उच्च टीकाकरण जरुरी है।



