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अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई मलेरिया जागरूकता कार्यशाला

मलेरिया दिवस पर आयोजित हुई जनजागरूकता गतिविधियां

भोपाल। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में मलेरिया कार्यशाला आयोजित की गई । जिसमें विद्यार्थियों मलेरिया के लक्षणों, मलेरिया से बचाव के उपाय ,जांच एवं उपचार के साथ-साथ मलेरिया उन्मूलन के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई । इसके साथ ही स्वास्थ्य संस्थाओं, स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों में पोस्टर एवं ड्राइंग प्रतियोगिता, जागरूकता रैली मलेरिया प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया।  स्वास्थ्य संस्थाओं में मलेरिया उपचार नीति के संबंध में उन्मुखीकरण किया गया। इस वर्ष यह दिवस  “Accelerate the fight against maleria for a more equitable world ” मनाया जा रहा है। जिसमें मलेरिया उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक गति देने पर जोर दिया जा रहा है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में आयोजित मलेरिया कार्यशाला में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने कहा कि मच्छर जनित बीमारियों में मलेरिया सबसे प्रचलित बीमारी है । यह बीमारी मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होती है। ठंड लगकर बुखार आना मलेरिया का सबसे प्रमुख लक्षण है । मलेरिया की जांच एवं दवाइयां सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निशुल्क उपलब्ध है । आशा कार्यकर्ता से संपर्क करके भी जांच करवाई जा सकती है ।

डॉ तिवारी ने बताया कि साल 2016 में भारत सरकार द्वारा नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन जारी किया गया है। इसके अंतर्गत पूरे देश में वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य एवं मलेरिया मुक्त क्षेत्र में पुनः संक्रमण रोकने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। मलेरिया प्रकरणों के आधार पर एनुअल पैरासाइटिक इनसिडेंस के अनुसार कैटिगरी 0,1,2 एवं 3 में श्रेणीबद्ध किया गया है । जिसके अंतर्गत मलेरिया नियंत्रण हेतु शीघ्र जांच एवं पूर्ण उपचार , घर-घर भ्रमण कर बुखार रोगियों की मलेरिया जांच हेतु सर्विलेंस, कीटनाशक युक्त मच्छरदानी का वितरण, कीटनाशक छिड़काव , लार्वा नियंत्रण हेतु गतिविधियां, प्रशिक्षण एवं सपोर्टिव सुपरविजन किया जा रहा है।

कार्यशाला में पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ मनोहर अगनानी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मलेरिया गांव से शहरों की ओर बढ़ा है। शहरों में अधिक संख्या लार्वा साइट्स होने, मच्छरों की ब्रीडिंग होने के कारण केसेज में बढ़ोतरी देखी गई थी। सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण इसमें अपेक्षित कमी आ रही है। राज्य मलेरिया अधिकारी डॉ हिमांशु जायसवार ने मध्यप्रदेश में मलेरिया उन्मूलन के क्षेत्र में किया जा रहे कार्यों की जानकारी दी । उन्होंने बताया कि शासकीय और निजी क्षेत्र के डाटा को कंपाइल कर विश्लेषण  किया जा रहा है। कार्यशाला में एंबेड परियोजना द्वारा मलेरिया जागरूकता प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें छात्रों को मलेरिया के लार्वा एवं गैंबुसिया मछली द्वारा लार्वा भक्षण की पद्धति को दिखाया गया।

जिला मलेरिया अधिकारी श्री अखिलेश दुबे ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया फैलाने वाले दो परजीवी प्लाज्मोडियम फेल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स है। एनाफिलीज मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपता है , जैसे कि धान का खेत तालाब, गड्ढे ,कृत्रिम जलाशय, छत पर बनी हुई टंकी, जल एकत्रित करने के लिए जमीन के अंदर बनी टंकी ,अनुपयोगी कुंए, जलधारा के किनारे से एकत्र जल, नदियां, हैंड पंप, नल के आसपास जमा पानी,  नहर में रुके हुए पानी इत्यादि।

मलेरिया का खतरा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा रहता है।  तेज ठंड देकर बुखार, कंपकपी, सिर दर्द ,बदन दर्द, उल्टी होना मलेरिया को प्रमुख लक्षण है । गंभीर अवस्था में यह खून की कमी का कारण भी हो सकता है । यदि इसका शीघ्र एवं पर्याप्त उपचार नहीं लिया जाए तो मलेरिया से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है । गर्भावस्था में मलेरिया गंभीर हो सकता है और जच्चा और बच्चा भी जान को भी खतरा हो सकता है। मलेरिया होने पर आरडीटी किट किट से जांच करवाकर मलेरिया उपचार नीति के अनुसार पूरा उपचार लेना आवश्यक होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी 60 वे सेशन में वर्ल्ड मलेरिया डे मनाए जाने हेतु निर्देश जारी किए गए थे, जिसके परिप्रेक्ष्य में मलेरिया दिवस की शुरुआत 2008 में अफ्रीका से हुई थी।  विश्व में अभी तक 40 देशों को मलेरिया फ्री घोषित किया गया है।  भारत देश मलेरिया मुक्ति के रास्ते पर है एवं वर्ष 2030 तक जीरो मलेरिया लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रयास किए जा रहे है। भोपाल को वर्ष 2025 तक मलेरिया मुक्त करने के लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में भोपाल जिले में मलेरिया का कोई भी केस नहीं है।

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